Thursday, December 27, 2007

अस्थिर-स्थिर

चलती रही हवा
चलती रही धरा
चलता रहा गगन
चलता रहा मन
चलता रहा जीवन
बस मैं थम गया

2 comments:

जेपी नारायण said...

चलेत रहो भाई जी
थमना गलत बात है।

परमजीत बाली said...

कई बार ऐसा लगता है...."बस मैं थम गया"
लेकिन जीवन है तो चलना होगा।
अपने मनोभावों को बखूबी प्रेषित किया है।

© Vikas Parihar | vikas